पापों की क्षमा का रहस्य और फसह

पापों की क्षमा का रहस्य और फसह

मनुष्य की आत्मा कहां से आई है?

इस दुनिया में ऐसा कोई नहीं है जो बिना दु:ख के जीता हो। इस दुनिया में हमेशा दर्द और दुख है। तब, इसका कारण क्या है? इसका जवाब पाने के लिए, हमें आत्मा के बारे में जानना चाहिए।

उत 2:7 … यहोवा परमेश्वर ने आदम को भूमि की मिट्टी से रचा, और उसके नथनों में जीवन का श्वास फूंक दिया; और आदम जीवित प्राणी बन गया।

परमेश्वर ने मनुष्य को मिट्टी और जीवन के श्वास से रचा। यहां पर, मिट्टी शरीर को दर्शाती है और जीवन का श्वास आत्मा को दर्शाता है। बाइबल कहती है कि जब मनुष्य मरता है, यह दोनों अलग हो जाते हैं और वे अपनी जगह जहां से वे आए, लौट जाते हैं।

सभ 12:7 … मिट्टी ज्यों की त्यों मिट्टी में मिल जाएगी, और आत्मा परमेश्वर के पास जिस ने उसे दिया लौट जाएगी।

“लौटने” का मतलब पहली जगह पर वापस जाना है। जैसे शरीर मिट्टी से आया, वह मिट्टी में लौट जाता है। जैसे आत्मा परमेश्वर से आई है, वह परमेश्वर के पास लौट जाती है। परमेश्वर कहां रहते हैं? वह स्वर्ग में रहते हैं। इसलिए इस पृथ्वी पर आने से पहले हम स्वर्ग में परमेश्वर के साथ थे। बाइबल आत्मिक प्राणियों को जो परमेश्वर के साथ हैं स्वर्गदूत कहती है।

पृथ्वी पर आने से पहले हम स्वर्ग में पहले से पैदा हुए थे

आइए हम उदाहरण के द्वारा इसकी पुष्टि करें।

नीत 8:22–30 यहोवा ने मुझे काम करने के आरम्भ में, वरन् अपने प्राचीनकाल के कामों से भी पहले उत्पन्न किया। मैं सदा से वरन् आदि ही से पृथ्वी की सृष्टि से पहले ही से ठहराई गई हूं। जब न तो गहिरा सागर था और न जल के सोते थे, तब ही से मैं उत्पन्न हुई। जब पहाड़ और पहाड़ियां स्थिर न की गई थीं, तब ही से मैं उत्पन्न हुई। जब यहोवा ने न तो पृथ्वी और न मैदान, न जगत की धूलि के परमाणु बनाए थे, इनसे पहले मैं उत्पन्न हुई।

जब परमेश्वर ने न तो पृथ्वी और न मैदान, न जगत की धूलि के परमाणु बनाए थे, तब सुलैमान कहां था? सुलैमान स्वर्गदूत के रूप में परमेश्वर के साथ स्वर्ग में था।

अय 38:1–4, 21 तब यहोवा ने अय्यूब को आंधी में से यूं उत्तर दिया… जब मैंने पृथ्वी की नींव डाली, तब तू कहां था? यदि तू समझदार हो तो उत्तर दे।… नि:सन्देह तू यह सब कुछ जानता होगा! क्योंकि तू तो उस समय उत्पन्न हो चुका था, और तू बहुत आयु का है।”

जब परमेश्वर ने पृथ्वी की नींव डाली अर्थात् जब परमेश्वर ने पृथ्वी की सृष्टि की, तब अय्यूब कहां था, और किस रूप में था? सुलैमान के समान, वह अवश्य स्वर्गदूत के रूप में स्वर्ग में रहा होगा।

क्या पृथ्वी की सृष्टि से पहले केवल सुलैमान और अय्यूब ही स्वर्ग में थे? नहीं। सुलैमान और अय्यूब हमारे जैसे मनुष्य थे। सुलैमान और अय्यूब के उदाहरण के द्वारा, परमेश्वर हमें दिखाते हैं कि इस पृथ्वी पर आने से पहले हम स्वर्ग में थे।

हम जो स्वर्ग में स्वर्गदूत थे पृथ्वी पर क्यों आए?

तब हम स्वर्ग छोड़कर इस पृथ्वी पर क्यों आए? हम जिन्हें स्वर्ग में महिमा में रहना चाहिए था अब इस पृथ्वी पर दुख और दर्द में जीवन क्यों जी रहे हैं? आइए हम यीशु की शिक्षाओं के द्वारा जो स्वर्ग से इस पृथ्वी पर आए इसका जवाब ढूंढ़ें।

लूक 19:10 “मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को ढूंढ़ने और उनका उद्धार करने आया है।”

यीशु ने कहा कि वह हमें ढूंढ़ने आए जो स्वर्ग में खो गए। तब हम स्वर्ग से क्यों खो गए?

मत 9:13 “… मैं धर्मियों को नहीं, परन्तु पापियों को बुलाने आया हूं।”

लूका अध्याय 19 कहता है कि यीशु स्वर्ग से खोए हुओं को ढूंढ़ने आए, और एक ही उद्देश्य के लिए मत्ती अध्याय 9 में उन्होंने कहा कि वह पापियों को बुलाने आए। दोनों वचनों की तुलना करते हुए, हम समझ सकते हैं कि हम पापों के कारण स्वर्ग से खो गए थे। हम इसलिए इस पृथ्वी पर आए क्योंकि हमने स्वर्ग में पाप किया था, और अब दुख में जीवन जीते हैं।

तब स्वर्ग में हमारा पाप कितना गंभीर था? बाइबल कहती है कि पाप की मजदूरी जो हमने किया मृत्यु है(रो 6:23)। इसका मतलब है कि हमने इतना गंभीर पाप किया जो मौत की सजा के योग्य है।

 हम स्वर्ग में कैसे वापस जा सकते हैं?

तब हम स्वर्ग में कैसे वापस जा सकते हैं? हम अपने पापों के कारण स्वर्ग से निकाल दिए गए थे। इसलिए जब हमारे पाप क्षमा किए जाएं, तब हम स्वर्ग में वापस जा सकते हैं। हमारे पापों को क्षमा करने के लिए, परमेश्वर स्वयं पृथ्वी पर आए। तब हम हमारे पापों की क्षमा कैसे प्राप्त कर सकते हैं?

इफ 1:7 उसके(यीशु) लहू के द्वारा छुटकारा, अर्थात् अपराधों की क्षमा मिली है।

 

मत 26:26–28 जब वे खा रहे थे तो यीशु ने रोटी ली, और आशीष मांगकर तोड़ी, और चेलों को देकर कहा, “लो, खाओ; यह मेरी देह है।” फिर उसने कटोरा लेकर धन्यवाद किया, और उन्हें देकर कहा, “तुम सब इसमें से पीओ, क्योंकि यह वाचा का मेरा वह लहू है, जो बहुतों के लिए पापों की क्षमा के निमित्त बहाया जाता है।”

यह वह समय है जब यीशु ने अपने चेलों के साथ फसह मनाया(मत 26:17)। यीशु ने वादा किया कि फसह का दाखमधु पापों की क्षमा के लिए उनका लहू है। यीशु के लहू के द्वारा पापों की क्षमा पाने के लिए, हमें फसह मनाना चाहिए।

फसह पापियों के लिए है

परमेश्वर ने किसके लिए फसह की स्थापना की? इसके बारे में आइए हम यीशु की शिक्षा पढ़ें जो यीशु ने फसह के दिन पर हमें दी(लूक 22:15)।

लूक 22:20 इसी रीति से उसने भोजन के बाद कटोरा भी यह कहते हुए दिया, “यह कटोरा मेरे उस लहू में जो तुम्हारे लिए बहाया जाता है नई वाचा है।”

यहां पर, “तुम्हारे” किसे दर्शाता है? वह हम लोगों को दर्शाता है जिन्हें पापों की क्षमा की जरूरत है। परमेश्वर ने स्वयं नई वाचा फसह को हमारे लिए स्थापित किया जिन्होंने स्वर्ग में पाप किया था।

दूसरे शब्दों में, फसह वह सच्चाई है जिसे यीशु ने जो पापियों को ढूंढ़ने आए हमारे पापों को क्षमा करने के लिए स्थापित किया है। इसलिए यदि हम स्वर्ग के राज्य में वापस जाना चाहते हैं, तो हमें फसह मनाना ही चाहिए।