जंगली बीज और गेहूं

जंगली बीज और गेहूं

जंगली बीज का दृष्टान्त

दुनिया में बहुत सारे चर्च हैं, और उनके सिद्धांत एक दूसरों से अलग हैं। तब हम झूठे चर्च और सच्चे चर्च का भेद कैसे कर सकते हैं? बाइबल जंगली बीज और गेहूं के द्वारा इसका भेद करती है।

मत 13:2430 यीशु ने उन्हें एक और दृष्टान्त दिया : “स्वर्ग का राज्य उस मनुष्य के समान है जिसने अपने खेत में अच्छा बीज बोया। पर जब लोग सो रहे थे तो उसका शत्रु आकर गेहूं के बीच जंगली बीज बोकर चला गया। जब अंकुर निकले और बालें लगीं, तो जंगली दाने के पौधे भी दिखाई दिए। इस पर गृहस्थ के दासों ने आकर उससे कहा, ‘हे स्वामी, क्या तू ने अपने खेत में अच्छा बीज न बोया था? फिर जंगली दाने के पौधे उसमें कहां से आए?’ उसने उनसे कहा, ‘यह किसी शत्रु का काम है।’ दासों ने उससे कहा, ‘क्या तेरी इच्छा है, कि हम जाकर उनको बटोर लें?’ उसने कहा, ‘नहीं, ऐसा न हो कि जंगली दाने के पौधे बटोरते हुए तुम उनके साथ गेहूं भी उखाड़ लो। कटनी तक दोनों को एक साथ बढ़ने दो, और कटनी के समय मैं काटनेवालों से कहूंगा कि पहले जंगली दाने के पौधे बटोरकर जलाने के लिए उनके गट्ठे बांध लो, और गेहूं को मेरे खत्ते में इकट्ठा करो’।”

जंगली बीज व गेहूं इतना समान दिखते हैं कि उनके बीच भेद करना बहुत मुश्किल है। अगर खेत में जंगली बीज को गेहूं के साथ रहने दिया जाए, तो थोड़े समय में, खेत जंगली बीज से भर जाएगा। इस दृष्टान्त में, खेत के स्वामी ने कहा कि कटनी के समय, जंगली दाने के पौधे बटोरे जाएंगे और जलाए जाएंगे, और गेहूं को खत्ते में इकट्ठा किया जाएगा। तब, जंगली बीज क्या है? आइए हम यीशु की शिक्षा के द्वारा देखें।

मत 13:3642 तब वह भीड़ को छोड़कर घर में आया, और उसके चेलों ने उसके पास आकर कहा, “खेत के जंगली दाने का दृष्टान्त हमें समझा दे।” उसने उनको उत्तर दिया, “अच्छे बीज का बोनेवाला मनुष्य का पुत्र है। खेत संसार है, अच्छा बीज राज्य की सन्तान, और जंगली बीज दुष्ट की सन्तान हैं। जिस शत्रु ने उनको बोया वह शैतान है; कटनी जगत का अन्त है, और काटनेवाले स्वर्ग दूत हैं। अत: जैसे जंगली दाने बटोरे जाते और जलाए जाते हैं वैसा ही जगत के अन्त में होगा। मनुष्य का पुत्र अपने स्वर्गदूतों को भेजेगा, और वे उसके राज्य में से सब ठोकर के कारणों को और कुकर्म करनेवालों को इकट्ठा करेंगे, और उन्हें आग के कुण्ड में डालेंगे, जहां रोना और दांत पीसना होगा।”

दृष्टान्त में, जंगली दाने बटोरे जाते और आग में जलाए जाते हैं। इसकी व्याख्या में, कुकर्म करनेवाले आग के कुण्ड में फेंक दिए जाएंगे। इसलिए, जंगली बीज कुकर्म करनेवाले हैं। तब, कुकर्म क्या है? कुकर्म को जानने के लिए, भले और बुरे को अलग करने का मानक होना चाहिए। वह मानक ही नियम है। और भले और बुरे को पूरी तरह से अलग करने का नियम ही परमेश्वर की व्यवस्था है। इसलिए, बाइबल में ‘कुकर्म’ आज्ञा का उल्लंघन करना है। जो परमेश्वर की आज्ञा का उल्लंघन करते हैं, वे आग के कुण्ड में डाले जाएंगे। यीशु के यह दृष्टान्त हमें सिखाता है कि यीशु के स्वर्ग जाने के बाद शैतान कुकर्म बोएगा, और अंत के युग में पूरी दुनिया में कुकर्म भर जाएगा।

इसलिए यीशु ने कहा कि कुकर्म करनेवाले यानी परमेश्वर की आज्ञा का उल्लंघन करने वाले स्वर्ग के राज्य में कभी प्रवेश नहीं करेंगे।

मत 7:2123 “जो मुझ से, ‘हे प्रभु! हे प्रभु!’ कहता है, उनमें से हर एक स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न करेगा, परन्तु वही जो मेरे स्वर्गीय पिता की इच्छा पर चलता है। उस दिन बहुत से लोग मुझ से कहेंगे, ‘हे प्रभु, हे प्रभु, क्या हम ने तेरे नाम से भविष्यद्वाणी नहीं की, और तेरे नाम से दुष्टात्माओं को नहीं निकाला, और तेरे नाम से बहुत से आश्चर्यकर्म नहीं किए?’ तब मैं उनसे खुलकर कह दूंगा, ‘मैंने तुम को कभी नहीं जाना। हे कुकर्म करनेवालो, मेरे पास से चले जाओ’।”

चाहे वे ईसाई जैसे दिखते हैं, फिर भी परमेश्वर की आज्ञा का उल्लंघन करने वाले स्वर्ग के राज्य में कभी प्रवेश नहीं कर सकते। यह वैसा ही होगा जैसे किसान जंगली बीज को खत्ते में इकट्ठा नहीं करता परन्तु उन्हें केवल जलाता है।

इस भविष्यवाणी के अनुसार, इन दिनों में चर्च जो परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन नहीं करते, वे जंगली बीज हैं। उदाहरण के लिए, चर्च जो परमेश्वर की आज्ञाएं, सब्त और फसह के बदले रविवार की आराधना और क्रिसमस मनाते हैं वे जंगली बीज जैसे चर्च हैं।

प्रेरितों के युग का सत्य

सभी चर्चों को उस समय में वापस जाना चाहिए जब कुकर्म बोया नहीं गया था। इसका अर्थ है कि हमें प्रथम चर्च के सत्य और विश्वास में वापस जाना चाहिए।

इफ 2:20 और प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं की नींव पर, जिसके कोने का पत्थर मसीह यीशु स्वयं ही है, बनाए गए हो।

प्रेरितों के युग का सत्य सिद्ध है जिसे प्रेरितों ने सीधे यीशु से सीखा था। तब प्रेरितों के युग में कौन से सत्य मनाये जाते थे?

लूक 4:16 फिर वह नासरत में आया, जहां पाला पोसा गया था; और अपनी रीति के अनुसार सब्त के दिन आराधनालय में जाकर पढ़ने के लिए खड़ा हुआ।

यीशु ने अपनी रीति के अनुसार सब्त मनाने का नमूना दिखाया था। इसलिए प्रेरित यीशु के नमूने का पालन करते हुए सब्त मनाते थे।

प्रे 17:2 पौलुस अपनी रीति के अनुसार उनके पास गया, और तीन सब्त के दिन पवित्रशास्त्रों से उनके साथ वाद–विवाद किया।

कुकर्म बोए जाने से पहले, सब्त मनाया जाता था। परन्तु प्रेरितों के युग के बाद, रविवार की आराधना बोई गई, जो कुकर्म है।

अगला, आइए हम फसह के बारे में सोचें। फसह नई वाचा है जिसे यीशु ने स्वयं स्थापित किया।

मत 26:1719, 2628 अखमीरी रोटी के पर्व के पहले दिन, चेले यीशु के पास आकर पूछने लगे, “तू कहां चाहता है कि हम तेरे लिए फसह खाने की तैयारी करें?” उसने कहा… “मैं अपने चेलों के साथ तेरे यहां पर्व मनाऊंगा।” अत: चेलों ने यीशु की आज्ञा मानी और फसह तैयार किया… जब वे खा रहे थे तो यीशु ने रोटी ली, और आशीष मांगकर तोड़ी, और चेलों को देकर कहा, “लो, खाओ; यह मेरी देह है।” फिर उसने कटोरा लेकर धन्यवाद किया, और उन्हें देकर कहा, “तुम सब इसमें से पीओ, क्योंकि यह वाचा का मेरा वह लहू है, जो बहुतों के लिए पापों की क्षमा के निमित्त बहाया जाता है।”

यीशु के नमूने के अनुसार प्रथम चर्च फसह मनाता था(1कुर 5:7–8)। लेकिन अब दुनिया में चर्च ऑफ गॉड के अलावा, कोई चर्च फसह नहीं मनाता। क्योंकि 325 ई. में निकिया परिषद के द्वारा फसह मिटा दिया गया था। आइए हम कुकर्म बोए जाने से पहले प्रथम चर्च के सत्य के बारे में और पढ़ें।

1कुर 11:16 तुम मेरी सी चाल चलो जैसा मैं मसीह की सी चाल चलता हूं… जो पुरुष सिर ढांके हुए प्रार्थना या भविष्यद्वाणी करता है, वह अपने सिर का अपमान करता है। परन्तु जो स्त्री उघाड़े सिर प्रार्थना या भविष्यद्वाणी करती है, वह अपने सिर का अपमान करती है, क्योंकि वह मुण्डी होने के बराबर है। यदि स्त्री ओढ़नी न ओढ़े तो बाल भी कटा ले; यदि स्त्री के लिए बाल कटाना या मुण्डन कराना लज्जा की बात है, तो ओढ़नी ओढ़े।

प्रथम चर्च का सत्य, “आराधना के दौरान, स्त्री को अपना सिर ढकना चाहिए और पुरुष को अपना सिर नहीं ढकना चाहिए,” यह भी जंगली बीज बोए जाने से बदल गया।

आइए हम कुकर्म बोए जाने से पहले प्रथम चर्च के सत्य के बारे में और पढ़ें।

प्रे 2:14 जब पिन्तेकुस्त का दिन आया, तो वे सब एक जगह इकट्ठे थे… वे सब पवित्र आत्मा से भर गए, और जिस प्रकार आत्मा ने उन्हें बोलने की सामर्थ्य दी, वे अन्य अन्य भाषा बोलने लगे।

यूह 7:2, 3739 यहूदियों का झोपड़ियों का पर्व निकट था… पर्व के अंतिम दिन, जो मुख्य दिन है; यीशु खड़ा हुआ और पुकारकर कहा, “यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आए और पीए। जो मुझ पर विश्वास करेगा; जैसा पवित्रशास्त्र में आया है, ‘उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी’।” उसने यह वचन पवित्र आत्मा के विषय में कहा, जिसे उस पर विश्वास करनेवाले पाने पर थे।

कुकर्म बोए जाने से पहले, यीशु और प्रेरितों ने सब्त, फसह, ओढ़नी का नियम, पिन्तेकुस्त का दिन और झोपड़ियों का पर्व मनाया। संत जो प्रथम चर्च के इन सत्य को मनाते हैं, वे दृष्टान्त में गेहूं हैं।

इन दिनों, बहुत से चर्च का बाहरी रूप शानदार है, परन्तु वे कुकर्म करते हैं। ऐसे चर्च दृष्टान्त में जंगली बीज हैं। चाहे गेहूं कमजोर और छोटा हो, फिर भी जो किसान चाहता है, वह जंगली बीज नहीं, पर गेहूं है। भले ही चर्च जो सत्य का पालन करता है, सकेत फाटक की तरह दिखता है, हमें उद्धार पाने के लिए उससे प्रवेश करना चाहिए। आइए हम प्रेरितों के युग के सत्य का पालन करें और गेहूं के रूप में स्वर्गीय खत्ते में प्रवेश करें।