जीवन का वृक्ष और मसीह आन सांग होंग

जीवन का वृक्ष और मसीह आन सांग होंग

जगत की उत्पत्ति से गुप्त रहा रहस्य

सभी मानवजाति मृत्यु की पीड़ा में कराहती है। मनुष्य जो संसार के प्राणियों में सर्वोच्च प्राणी माना जाता है क्यों मर जाता है? बाइबल कहती है कि मृत्यु अदन वाटिका में शुरू हुई। जहां समस्या है वहां उसका समाधान है। मानवजाति के लिए अनंत जीवन जीने का रहस्य भी अदन वाटिका में है।

मत 13:34–35 ये सब बातें यीशु ने दृष्टान्तों में लोगों से कहीं, और बिना दृष्टान्त वह उन से कुछ न कहता था, कि जो वचन भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा गया था, वह पूरा हो: “मैं दृष्टान्त कहने को अपना मुंह खोलूंगा: मैं उन बातों को जो जगत की उत्पत्ति से गुप्त रही हैं प्रगट करूंगा।”

इसका अर्थ है कि जगत की उत्पत्ति से कुछ रहस्य गुप्त हैं। बाइबल की कौन सी पुस्तक में जगत की उत्पत्ति लिखी है? वह उत्पत्ति की पुस्तक है। उत्पत्ति में छिपे कई रहस्यों में से, आइए हम जीवन के वृक्ष के बारे में अध्ययन करें।

भले और बुरे के ज्ञान का वृक्ष मृत्यु की ओर ले जाता है और जीवन का वृक्ष अनंत जीवन की ओर ले जाता है

परमेश्वर ने आदम और हव्वा को अदन वाटिका में रखा और भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष का फल खाने से मना किया।

उत 2:16–17 और यहोवा परमेश्वर ने आदम को यह आज्ञा दी, “तू वाटिका के सब वृक्षों का फल बिना खटके खा सकता है; पर भले या बुरे के ज्ञान का जो वृक्ष है, उसका फल तू कभी न खाना: क्योंकि जिस दिन तू उसका फल खाएगा उसी दिन अवश्य मर जाएगा।”

आदम और हव्वा सर्प के द्वारा भरमाए गए, और भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष का फल खाया और वे मर गए। परिणाम स्वरूप, सभी मानवजाति मृत्यु की पीड़ा में कराहती है। फिर, नश्वर मनुष्यों को अनंत जीवन जीने के लिए कोई मार्ग नहीं है?

उत 3:22–24 फिर यहोवा परमेश्वर ने कहा, “मनुष्य भले बुरे का ज्ञान पाकर हम में से एक के समान हो गया है: इसलिए अब ऐसा न हो कि वह हाथ बढ़ाकर जीवन के वृक्ष का फल भी तोड़ के खा ले और सदा जीवित रहे।” इसलिए यहोवा परमेश्वर ने उसको अदन की वाटिका में से निकाल दिया कि वह उस भूमि पर खेती करे जिस में से वह बनाया गया था। इसलिए आदम को उसने निकाल दिया और जीवन के वृक्ष के मार्ग का पहरा देने के लिए अदन की वाटिका के पूर्व की ओर करूबों को, और चारों ओर घूमनेवाली ज्वालामय तलवार को भी नियुक्त कर दिया।

हालांकि, पापी भी सदा जीवित रह सकते थे यदि उन्होंने जीवन के वृक्ष का फल खाया। इसलिए परमेश्वर ने ज्वालामय तलवार और करूबों को नियुक्त करके जीवन के वृक्ष के मार्ग का पहरा दिया ताकि पापी जीवन के वृक्ष का फल नहीं खा सकें। आइए हम इस पर विचार करें। यदि कोई पापियों को जीवन के वृक्ष का फल खाने की अनुमति देता है जो उनके लिए मना किया गया था, वह कौन है? परमेश्वर। परमेश्वर के अलावा उसकी अनुमति कौन दे सकता है जिसे परमेश्वर ने मना किया?

जीवन के वृक्ष की असलियत फसह है

अदन वाटिका में जीवन का वृक्ष एक दृष्टान्त है। जीवन के वृक्ष की असलियत क्या है?

यूह 6:53–54 यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुम से सच सच कहता हूं जब तक तुम मनुष्य के पुत्र का मांस न खाओ, और उसका लहू न पीओ, तुम में जीवन नहीं। जो मेरा मांस खाता, और मेरा लहू पीता है, अनन्त जीवन उसी का है, और मैं उसे अंतिम दिन फिर जिला उठाऊंगा।”

अदन वाटिका में अनंत जीवन पाने के लिए हमें क्या खाना चाहिए था? वह जीवन के वृक्ष का फल था। यीशु ने हमें अनंत जीवन पाने के लिए क्या खाने को कहा? वह यीशु का मांस और लहू है। तब यीशु का मांस और लहू अदन वाटिका में जीवन के वृक्ष की असलियत है। फिर हम यीशु का मांस और लहू कैसे प्राप्त कर सकते हैं?

मत 26:17–19, 26–28 अखमीरी रोटी के पर्व के पहले दिन, चेले यीशु के पास आकर पूछने लगे, “तू कहां चाहता है कि हम तेरे लिए फसह खाने की तैयारी करें?” उसने कहा… “मैं अपने चेलों के साथ तेरे यहां पर्व मनाऊंगा।” अत: चेलों ने यीशु की आज्ञा मानी और फसह तैयार किया… जब वे खा रहे थे तो यीशु ने रोटी ली, और आशीष मांगकर तोड़ी, और चेलों को देकर कहा, “लो, खाओ; यह मेरी देह है।” फिर उसने कटोरा लेकर, धन्यवाद किया, और उन्हें देकर कहा, “तुम सब इसमें से पीओ, क्योंकि यह वाचा का मेरा वह लहू है, जो बहुतों के लिए पापों की क्षमा के निमित्त बहाया जाता है।

यीशु ने फसह की रोटी को क्या कहा? उन्होंने कहा कि वह “मेरा मांस” है। फसह के दाखमधु को उन्होंने क्या कहा? उन्होंने कहा कि वह मेरा लहूहै। यूहन्ना अध्याय 6 कहता है कि यीशु का मांस और लहू अदन वाटिका में जीवन का वृक्ष है। इसलिए फसह यीशु का मांस और लहू अर्थात् जीवन के वृक्ष का फल खाने की विधि है। दूसरे शब्दों में, मानवजाति के लिए मृत्यु की पीड़ा से मुक्त होकर अनंत जीवन पाने का मार्ग फसह मनाना है।

मसीह के इस पृथ्वी पर आने का उद्देश्य

पापियों को जीवन के वृक्ष में से जिसका करूब और ज्वालामय तलवार से पहरा दिया गया फिर से खाने की अनुमति कौन दे सकता है? केवल परमेश्वर।

इसलिए, पापियों को बचाने के लिए जो भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष का फल खाकर मरने के लिए नियुक्त किए गए हैं, परमेश्वर को खुद जीवन के वृक्ष का फल ले आना चाहिए।

यूह 10:10 “… मैं इसलिए आया कि वे जीवन पाएं, और बहुतायत से पाएं।”

यीशु हमें अनंत जीवन देने के लिए इस पृथ्वी पर आए। बाइबल कहती है कि हम पापियों को जीवन पाने के लिए जो भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष का फल खाकर मरने लिए नियुक्त किए गए हैं, क्या खाना चाहिए? वह जीवन के वृक्ष का फल है। वह सत्य क्या है जिसके द्वारा हम जीवन के वृक्ष का फल खा सकते हैं? वह फसह का सत्य है। जीवन के वृक्ष का सत्य, फसह को स्थापित करने के लिए इस पृथ्वी पर कौन आए? यीशु स्वयं जो परमेश्वर हैं इस पृथ्वी पर आए। वह इसलिए कि केवल परमेश्वर जीवन के वृक्ष का मार्ग खोल सकते हैं।

मसीह के दूसरी बार आने का कारण

हालांकि, शैतान ने 325 ई. में निकिया की परिषद में फसह को मिटा दिया। जीवन का वृक्ष, फसह के बिना हम कैसे बचाए जाने की उम्मीद कर सकते हैं? इसलिए यह भविष्यवाणी हुई है कि यीशु अंत के युग में अपने लोगों को बचाने के लिए दूसरी बार आएंगे।

इब्र 9:28 वैसे ही मसीह भी बहुतों के पापों को उठा लेने के लिए एक बार बलिदान हुआ; और जो लोग उस की बाट जोहते हैं उनके उद्धार के लिए दूसरी बार बिना पाप उठाए हुए दिखाई देगा।

यीशु के दूसरी बार आने का उद्देश्य क्या है? वह हमें अनंत जीवन देना है। मानवजाति को बचाने के लिए जो मरने के लिए नियुक्त है, उन्हें अदन वाटिका में क्या ले आना चाहिए? वह जीवन का वृक्ष है। वह सत्य क्या है जिसके द्वारा हम जीवन के वृक्ष का फल खा सकते हैं? वह फसह है। इसलिए जब यीशु दूसरी बार आएंगे, उन्हें फसह लाना चाहिए।

इस युग में कौन हमारे लिए फसह ले आया है? वह मसीह आन सांग होंग हैं। मसीह आन सांग होंग दूसरी बार आने वाले मसीह हैं जो बाइबल की भविष्यवाणियों के अनुसार इस युग में प्रकट हुए हैं; वह परमेश्वर हैं।