अंजीर के पेड़ का दृष्टान्त

अंजीर के पेड़ का दृष्टान्त

अंजीर के पेड़ से यह दृष्टान्त सीखो

बाइबल वह पुस्तक है जो मसीह के बारे में साक्षी देती है(यूह 5:39)। बाइबल में मसीह के संबंधित बहुत सी भविष्यवाणियों में से, दूसरी बार आने वाले यीशु के आगनन के समय के बारे में आइए हम “अंजीर के पेड़ का दृष्टान्त,” इस विषय के द्वारा पढ़ें। पुराने नियम की बाइबल ने यीशु के पहले आगमन के समय के बारे में भविष्यवाणी की थी और उस भविष्यवाणी के अनुसार यीशु आए। उसी तरह, बाइबल उनके दूसरे आगमन के बारे में भी भविष्यवाणी करती है। यीशु कब फिर से आएंगे?

2,000 वर्ष पहले, चेलों ने यीशु से उनके दूसरे आगमन के चिन्ह के बारे में पूछा था(मत 24:3)। जब यीशु ने अपने दूसरे आगमन के समय के बारे में बताया, उन्होंने अंजीर के पेड़ से यह दृष्टान्त सीखने को कहा।

मत 24:32–33 “अंजीर के पेड़ से यह दृष्टान्त सीखो: जब उसकी डाली कोमल हो जाती और पत्ते निकलने लगते हैं, तो तुम जान लेते हो कि ग्रीष्म काल निकट है। इसी रीति से जब तुम इन सब बातों को देखो, तो जान लो कि वह निकट है, वरन् द्वार ही पर है।”

लिखा गया है, “इसी रीति से जब तुम इन सब बातों को देखो, तो जान लो कि वह निकट है, वरन् द्वार ही पर है।” इसलिए हम यीशु के दूसरे आगमन का समय तब जान सकते हैं जब हम अंजीर के पेड़ के दृष्टान्त के जरिए दिए गए चिन्ह को देखते हैं।

बाइबल में अंजीर का पेड़ किसको दर्शाता है? निष्कर्ष में, वह इस्राएल को दर्शाता है।

अंजीर के पेड़ से एक असली सबक

मर 11:12–14, 20–21 दूसरे दिन जब वे बैतनिय्याह से निकले तो उसको भूख लगी। और वह दूर से अंजीर का एक हरा पेड़ देखकर निकट गया कि क्या जाने उसमें कुछ पाए: पर पत्तें को छोड़ कुछ न पाया; क्योंकि फल का समय न था। इस पर उसने उससे कहा, “अब से कोई तेरा फल कभी न खाए!” और उसके चेले सुन रहे थे… फिर भोर को जब वे उधर से जाते थे तो उन्होंने उस अंजीर के पेड़ को जड़ तक सूखा हुआ देखा। पतरस को वह बात स्मरण आई, और उसने उससे कहा, “हे रब्बी, देख! यह अंजीर का पेड़ जिसे तू ने स्राप दिया था सूख गया है।

उस समय सभी इस्राएली जानते थे कि बाइबल में अंजीर का पेड़ इस्राएल को दर्शाता है। अंजीर का पेड़ जिसमें फल नहीं था, उन इस्राएलियों को दर्शाता है जिन्होंने यीशु पर विश्वास नहीं किया। यह बताने के लिए कि इस्राएल जिसने फल फलने की बजाय यीशु का इनकार किया जो इस पृथ्वी पर आए और सुसमाचार का प्रचार किया, उसका न्याय किया जाएगा और अंजीर के पेड़ की तरह नष्ट किया जाएगा, यीशु ने पेड़ को शाप दिया और उसे सूखा दिया।

अंजीर के पेड़ के जरिए शिक्षा

लूक 13:6–9 फिर उसने यह दृष्टान्त भी कहा: “किसी की अंगूर की बारी में एक अंजीर का पेड़ लगा हुआ था। वह उसमें फल ढूंढ़ने आया, परन्तु न पाया। तब उस ने बारी के रखवाले से कहा, ‘देख तीन वर्ष से मैं इस अंजीर के पेड़ में फल ढूंढ़ने आता हूं, परन्तु नहीं पाता, इसे काट डाल कि यह भूमि को भी क्यों रोके रहे?’ उसने उसको उत्तर दिया, ‘हे स्वामी, इसे इस वर्ष और रहने दे कि मैं इसके चारों ओर खोदकर खाद डालूं। यदि आगे को फले तो भला, नहीं तो उसे काट डालना’।”

इस दृष्टान्त में, तीन वर्ष से अंजीर के पेड़ में फल ढूंढ़ने वाला यीशु थे। यीशु ने 30 वर्ष की आयु में बपतिस्मा लिया और जब तक वह क्रूस पर न चढ़ाए गए तब तक उन्होंने इस्राएल में तीन साल तक सुसमाचार का प्रचार किया। उन्होंने दृष्टान्त का प्रयोग करके कहा कि उन्होंने तीन साल तक अंजीर के पेड़ में फल ढूंढ़ा था।

यीशु ने इस्राएलियों को जो अंजीर के पेड़ से दर्शाए गए थे, चेतावनी दी कि इस्राएल जिन्होंने यीशु का अपमान किया और सुसमाचार को ग्रहण नहीं किया था, परमेश्वर से उनका न्याय किया जाएगा और वे नष्ट किए जाएंगे।

इस्राएल के नाश के बारे में भविष्यवाणी

लूक 21:20–24 “जब तुम यरूशलेम को सेनाओं से घिरा हुआ देखो, तो जान लेना कि उसका उजड़ जाना निकट है। तब जो यहूदिया में हों वे पहाड़ों पर भाग जाएं; और जो यरूशलेम के भीतर हों वे बाहर निकल जाएं; और जो गावों में हों वे उस में न जांए। क्योंकि यह बदला लेने के ऐसे दिन होंगे, जिन में लिखी हुई सब बातें पूरी हो जाएंगी। उन दिनों में जो गर्भवती और दूध पिलाती होंगी, उनके लिये हाय, हाय! क्योंकि देश में बड़ा क्लेश और इन लोगों पर बड़ा प्रकोप होगा। वे तलवार के कौर हो जाएंगे, और सब देशों के लोगों में बन्दी होकर पहुंचाए जाएंगे;

यीशु की भविष्यवाणी के अनुसार, तीतुस की अगुवाई में रोमन सेना के द्वारा इस्राएल सन 70 ई. में नष्ट किया गया।

इस वचन के अनुसार, “वे तलवार के कौर हो जाएंगे, और सब देशों के लोगों में बन्दी होकर पहुंचाए जाएंगे,” 11 लाख लोग मारे गए और बचे 97 हजार लोगों को बंदी बनाया गया। इस्राएल जिसने अंत तक उस सुसमाचार का इनकार किया जिसका यीशु ने प्रचार किया था, सूख गया और काट दिया गया।

इस्राएल का पुन:स्थापन और दूसरी बार आने वाले यीशु का प्रकट होना

क्या इस्राएल हमेशा के लिए मरे रहेगा? नहीं। यीशु ने कहा कि इस्राएल निश्चित समय पर पुन:स्थापित होगा

लूक 21:24 और जब तक अन्य जातियों का समय पूरा न हो, तब तक यरूशलेम अन्य जातियों से रौंदा जाएगा।

“जब तक अन्य जातियों का समय पूरा न हो,” इसका मतलब है कि वह अवधि निर्धारित है जब तक यरूशलेम अन्य जातियों से रौंदा जाएगा। इस भविष्यवाणी के अनुसार, इस्राएली जो यरूशलेम के विनाश के बाद करीब 1,900 सालों तक पूरे विश्व में भटक रहे थे, वे अपने पूर्वजों के देश में वापस आए और अपना देश स्थापित किया। द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने के बाद, इस्राएल सन 1948 में चमत्कार पूर्ण ढंग से स्वतंत्र हुआ।

परमेश्वर ने किसलिए 1,900 सालों तक मरे हुए अंजीर के पेड़ को फिर से जीवित कर दिया?

मत 24:32–33 “अंजीर के पेड़ से यह दृष्टान्त सीखो: जब उसकी डाली कोमल हो जाती और पत्ते निकलने लगते हैं, तो तुम जान लेते हो कि ग्रीष्म काल निकट है। इसी रीति से जब तुम इन सब बातों को देखो, तो जान लो कि वह निकट है, वरन् द्वार ही पर है।”

इस भविष्यवाणी की तरह कि “जब अन्य जातियों का समय पूरा हो, यरूशलेम की पुन:स्थापना होगी,” यह एक भविष्यवाणी है कि इस्राएल तब स्वतंत्र हो जाएगा जब परमेश्वर का निर्धारित समय आता है। तब, यीशु ने हमें किस कारण से यह बताया है? उन्होंने हमें क्या समझाना चाहा? उन्होंने दूसरी बार आने वाले यीशु के चिन्ह दिखाने के लिए यह सब कार्य किए। यही परमेश्वर के इस्राएल का पुन:र्निर्माण करने का अभिप्राय है।

मानव इतिहास में, इस्राएल के अलावा कोई ऐसा देश नहीं है जिसने 1,900 वर्ष के बाद अपना देश का पुन:र्निर्माण किया। संसार के लोग जो यह भविष्यवाणी नहीं जानते, सोचते हैं कि यह इसलिए संभव हुआ क्योंकि इस्राएली विशेष हैं, लेकिन वास्तव में परमेश्वर ने इन सबको संभव बनाया क्योंकि उनके पास निश्चित उद्देश्य था। परमेश्वर का उद्देश्य क्या था? वह यह प्रकट करने के लिए था कि यीशु जो भविष्यवाणी के अनुसार दूसरी बार आते हैं, सन 1948 में द्वार पर होंगे जब अंजीर का पेड़ जीवित होता है।

तब, इसका मतलब क्या है कि “मनुष्य का पुत्र द्वार ही पर है”?

प्रक 3:20 देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूं; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूंगा, और वह मेरे साथ।

इसलिए इस वचन, कि सन 1948 में जब इस्राएल स्वतंत्र हुआ, मनुष्य का पुत्र द्वार ही पर है, का मतलब है कि हमें हमारे मन का द्वार खोल कर उन्हें ग्रहण करना चाहिए क्योंकि वह फिर से आए हैं और सुसमाचार का प्रचार कर रहे हैं।

वह जो इस भविष्यवाणी के अनुसार आए, मसीह आन सांग होंग जी हैं। मसीह आन सांग होंग जी ने सन 1948 में बपतिस्मा लिया और तब से सुसमाचार का प्रचार करने लगे। इसलिए मसीह आन सांग होंग जी दूसरी बार आने वाले मसीह हैं जिनकी साक्षी बाइबल में है। आइए हम मसीह आन सांग होंग जी पर विश्वास करें जो बाइबल की भविष्यवाणी के अनुसार प्रगट हुए, और उन्हें ग्रहण करके बचाए जाएं।