स्वर्गीय विवाह भोज

यीशु के पहली बार आते समय, दुल्हिन प्रकट नहीं हुई थी

विवाह भोज एक बहुत सुखद बात है। यीशु ने हमारे उद्धार पाने की तुलना विवाह भोज से की थी।

यीशु फिर उनसे दृष्टन्तों में कहने लगा, “स्वर्ग का राज्य उस राजा के समान है, जिसने अपने पुत्र का विवाह किया। और उसने अपने दासों को भेजा कि निमन्त्रित लोगों को विवाह के भोज में बुलाए; परन्तु उन्होंने आना न चाहा… तब उसने अपने दासों से कहा, ‘विवाह का भोज तो तैयार है परन्तु निमन्त्रित लोग योग्य नहीं ठहरे। इसलिए चौराहों पर जाओ और जितने लोग तुम्हें मिलें, सबको विवाह के भोज में बुला लाओ।’ अत: उन दासों ने सड़कों पर जाकर क्या बुरे क्या भले, जितने मिले, सबको इकट्ठा किया; और विवाह का घर अतिथियों से भर गया।

मत 22:1–10

क्या विवाह होने को संभव बनाता है? एक दूल्हा, एक दुल्हिन और निमन्त्रित लोग होने चाहिए जो विवाह के लिए अतिथि हैं। हालांकि, इस दृष्टान्त में पुत्र जो दूल्हा है, और अतिथि दिखाई देते हैं, परन्तु दुल्हिन नहीं है। यीशु के पहली बार आते समय दुल्हिन क्यों प्रगट नहीं हुई? यह इसलिए क्योंकि दुल्हिन परमेश्वर के 6,000–वर्ष के उद्धार कार्य के अंत में प्रगट होती है।

दुल्हिन जो अन्त के दिनों में प्रकट होती है

“आओ, हम आनन्दित और मगन हों, और उसकी स्तुति करें, क्योंकि मेमने का विवाह आ पहुंचा है, और उसकी दुल्हिन ने अपने आप को तैयार कर लिया है। उसको शुद्ध और चमकदार महीन मलमल पहिनने का अधिकार दिया गया”– क्योंकि उस महीन मलमल का अर्थ पवित्र लोगों के धर्म के काम है। तब स्वर्गदूत ने मुझ से कहा, “यह लिख, कि धन्य वे हैं, जो मेमने के विवाह के भोज में बुलाए गए हैं।”…

प्रक 19:7–9

मेमने की पत्नी जो यीशु के पहली बार आते समय प्रगट नहीं हुई थी, विवाह भोज में प्रगट होती है। तब मेमने की पत्नी कौन है?

फिर जिन सात स्वर्गदूतों के पास सात अन्तिम विपत्तियों से भरे हुए सात कटोरे थे, उनमें से एक मेरे पास आया, और मेरे साथ बातें करके कहा, “इधर आ, मैं तुझे दुल्हिन अर्थात् मेमने की पत्नी दिखाऊंगा।” तब वह मुझे आत्मा में एक बड़े और ऊंचे पहाड़ पर ले गया, और पवित्र नगर यरूशलेम को स्वर्ग से परमेस्वर के पास से उतरते दिखाया।

प्रक 21:9–10

दुल्हिन अर्थात् मेमने की पत्नी स्वर्गीय यरूशलेम है। स्वर्गीय यरूशलेम से हमारा क्या संबंध है? आइए हम गलातियों की पुस्तक के माध्यम से ढूंढ़ें।

परन्तु ऊपर की यरूशलेम स्वतन्त्र है, और वह हमारी माता है।

गल 4:26

बाइबल भविष्यवाणी करती है कि अंत के दिनों में स्वर्गीय यरूशलेम माता स्वर्ग से आएंगी।

तब, मेमना कौन है जिनके पास अपनी दुल्हिन के रूप में हमारी यरूशलेम माता हैं? चूंकि उनके पास अपनी पत्नी के रूप में हमारी माता हैं, इसलिए वह हमारे पिता हैं

आत्मा और दुल्हिन दोनों कहती हैं, “आ!” और सुननेवाला भी कहे, “आ!” जो प्यासा हो वह आए, और जो कोई चाहे वह जीवन का जल सेंतमेंत ले।

प्रक 22:17

प्रकाशितवाक्य अध्याय 19 कहता है कि वे मेमना और उनकी दुल्हिन हैं, और 21कहता है मेमना और उनकी पत्नी। और प्रकाशितवाक्य अध्याय 22 कहता है कि वे पवित्र आत्मा और दुल्हिन हैं। इसलिए यह भी एक भविष्यवाणी है कि अंत के दिनों में हमारे पिता और माता साथ में प्रकट होंगे।

तब हमारे पिता और माता अंत के दिनों में क्यों प्रकट होते हैं? उनका उद्देश्य क्या है? वह हमें जीवन का जल यानी अनंत जीवन देने के लिए है। इसी कारण बाइबल कहती है, “धन्य वे हैं, जो मेमने के विवाह के भोज में बुलाए गए हैं।”(प्रक 19:9)। इसलिए, अनंत जीवन पाने के लिए, हमें स्वर्गीय पिता और स्वर्गीय माता पर भी विश्वास करना चाहिए।

दुल्हिन, हमारी माता को हमें कौन जानने देता है?

हमारी स्वर्गीय माता, पवित्र आत्मा की दुल्हिन को कौन स्थापित करता है? बाइबल स्पष्ट रूप से साबित करती है कि स्वर्गीय पिता स्वयं उनको स्थापित करते हैं।

“हे यरूशलेम, मैंने तेरी शहरपनाह पर पहरुए बैठाए हैं; वे दिन रात कभी चुप न रहेंगे। हे यहोवा को स्मरण करनेवालो, चुप न रहो, और जब तक वह यरूशलेम को स्थिर करके उसकी प्रशंसा पृथ्वी पर न फैला दे, तब तक उसे भी चैन न लेने दो।”

यश 62:6–7

बाइबल के अनुसार, यरूशलेम हमारी माता को कौन स्थापित करता है? वह यहोवा परमेश्वर, स्वर्गीय पिता हैं। स्वर्गीय माता को मनुष्य के द्वारा, या उनके व्यक्तित्व, बुद्धि या रूप–रंग से नहीं स्थापित किया जाता है। जैसे बाइबल में भविष्यवाणी की गई है, केवल स्वर्गीय पिता हमारी स्वर्गीय माता को स्थिर करते हैं।

परमेश्वर ने उत्पत्ति की पुस्तक में उपस्थित हुए आदम और हव्वा के माध्यम से अपनी इच्छा को हमें जानने दिया।

तब आदम ने कहा, “अब यह मेरी हड्डियों में की हड्डी और मेरे मांस में का मांस है; इसलिए इसका नाम नारी होगा, क्योंकि यह नर में से निकाली गई है।”

उत 2:23

आदम ने हव्वा को कहा “मेरी हड्डियों में की हड्डी और मेरे मांस में का मांस है।” आदम आने वाले अर्थात् दूसरी बार आने वाले यीशु को दर्शाता है(रो 5:14), और हव्वा स्वर्गीय माता को दर्शाती है। इसलिए यह भविष्यवाणी है कि दूसरी बार आने वाले यीशु, यानी स्वर्गीय पिता स्वर्गीय माता की गवाही देंगे। बाइबल भी हमसे कहती है कि स्वर्गीय माता कौन हैं।

आदम ने अपनी पत्नी का नाम हव्वा रखा; क्योंकि जितने मनुष्य जीवित हैं उन सब की आदिमाता वही हुई।

उत 3:20

किसने अपनी पत्नी का नाम हव्वा रखा? वह आदम था जो हमारे स्वर्गीय पिता को दर्शाता है। “हव्वा” नाम का अर्थ यहूदी भाषा में “जीवन” है (पदचिन्ह का संदर्भ)। इसलिए यह भविष्यवाणी है कि हमारे स्वर्गीय पिता हमें हमारी स्वर्गीय माता को जानने देंगे जो हमें जीवन देती हैं।

मसीह आन सांग होंग जो भविष्यवाणी के अनुसार पवित्र आत्मा परमेश्वर के रूप में आते हैं, हमारी स्वर्गीय माता की गवाही देते हैं। उन्होंने हमें सिखाया कि हम केवल माता के द्वारा अनंत जीवन पा सकते हैं। आइए हम हमारी स्वर्गीय माता पर विश्वास करें जिनके बारे में हमारे स्वर्गीय पिता ने हमें जानने दिया, और अंत तक उनका पालन करें। आइए हम स्वर्गीय माता से अनंत जीवन पाएं और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करें।

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