स्वर्गीय परिवार और सांसारिक परिवार

सांसारिक परिवार स्वर्गीय परिवार का प्रतिरूप और छाया है

सांसारिक व्यवस्था स्वर्गीय व्यवस्था का प्रतिरूप और छाया है। उनमें से, सांसारिक परिवार भी स्वर्गीय परिवार का प्रतिरूप और छाया है।

वे स्वर्ग में की वस्तुओं के प्रतिरूप और प्रतिबिम्ब की सेवा करते हैं।

इब्र 8:5

हमें स्वर्गीय परिवार व्यवस्था को समझने में मदद करने के लिए, परमेश्वर ने स्वर्गीय परिवार व्यवस्था के प्रतिरूप और

छाया के रूप में सांसारिक परिवार व्यवस्था बनाई।

सांसारिक परिवार में जो पतिरूप और छाया है एक पिता, माता और उनके बच्चे होते हैं। तब स्वर्गीय परिवार के बारे में क्या? चूंकि वह असलियत है, तो उसमें स्वर्गीय पिता, स्वर्गीय माता, और उनके बच्चे होने चाहिए।

स्वर्गीय परिवार के सदस्य

परिवार के सदस्यों में से, आइए हम पहले पिता के बारे में सोचें।

फिर जब कि हमारे शारीरिक पिता भी हमारी ताड़ना किया करते थे और हमने उनका आदर किया, तो क्या आत्माओं के पिता के और भी अधीन न रहें जिससे हम जीवित रहें।

इब्र 12:9

बाइबल सिखाती है कि जैसे हम शारीरिक पिता का आदर करते हैं वैसे हमें आत्माओं के पिता के अधीन रहना चाहिए। जैसे सांसारिक परिवार में पिता होता है, स्वर्गीय परिवार में आत्माओं के पिता होते हैं।

“… हे हमारे पिता, तु जो स्वर्ग में है…”

मत 6:9

“स्वर्ग में हमारे पिता” किसे संकेत करता है? यीशु ने हमें सिखाया कि परमेश्वर जो स्वर्ग में हैं, हमारे आत्मिक पिता हैं(मत 6:8)। स्वर्गीय परिवार में, आत्मिक पिता हैं। शब्द “पिता” में यह अर्थ है कि उसके पास बच्चे हैं। सांसारिक परिवार में जो पतिरूप और छाया है, पिता और बच्चे होते हैं। आइए हम पुष्टि करें कि स्वर्गीय परिवार में जो असलियत है आत्मिक बच्चे हैं।

“… और तुम मेरे बेटे और बेटियां होगे…”

2कुर 6:17–18

परमेश्वर हमें सिखाते हैं कि हम परमेश्वर के बेटे और बेटियां हैं।

स्वर्गीय परिवार में, आत्मिक पिता, और आत्मिक भाई और बहनें हैं। चूंकि बच्चे होते हैं, वहां माता होनी चाहिए जो बच्चे को जन्म देती है। चूंकि सांसारिक परिवार में जो प्रतिरूप और छाया है माता होती है, स्वर्गीय परिवार में जो असलियत है आत्मिक माता होनी चाहिए।

पर ऊपर की यरूशलेम स्वतंत्र है, और वह हमारी माता है।

गल 4:26

ऊपर की यरूशलेम कौन है? यहां पर, “हमारी” “परमेश्वर की संतान” को संकेत करता है जो बचाई जाएंगी। परमेश्वर की संतान के पास जो बचाई जाएंगी उनके आत्मिक पिता हैं और आत्मिक माता हैं। जैसे सांसारिक परिवार में बच्चे अपनी माता से जीवन पाते हैं, आत्मिक बच्चे आत्मिक माता पर विश्वास करने से अनंत जीवन प्राप्त करते हैं।

लहू से संबंधित परिवार

तब हम कैसे स्वर्गीय परिवार के सदस्य बन सकते हैं? परिवार लहू से संबंधित होता है। उसी तरह से, जब हम परमेश्वर का लहू प्राप्त करते हैं, हम परमेश्वर की संतान बन सकते हैं। इसी कारण मसीह ने हमें फसह की रोटी और दाखमधु के द्वारा स्वर्ग का लहू पाने की अनुमति दी।

“यह कटोरा मेरे लहू में जो तुम्हारे लिए बहाया जाता है नई वाचा है।”

लूक 22:20

फसह के द्वारा, हम स्वर्गीय माता–पिता का लहू पा सकते हैं। परमेश्वर की संतान होने का मतलब क्या है? इसका मतलब है कि हम परमेश्वर के वारिस के रूप में अनंत स्वर्ग के राज्य को प्राप्त करते हैं। हालांकि बाइबल का कहना है कि हम पूरे ब्रह्मांड के राजा परमेश्वर के वारिस हैं। यह हमारे लिए अविश्वसनीय सम्मान की बात है। हम बहुत उत्साह से उस महिमामय दिन के आने की उम्मीद करते हैं।

हमें स्वर्ग के राज्य के वारिस के रूप में क्या करना चाहिए?

आत्मा आप ही हमारी आत्मा के साथ गवाही देता है, कि हम परमेश्वर की संतान हैं; और यदि संतान हैं तो वारिस भी, वरन् परमेश्वर के वारिस और मसीह के संगी वारिस हैं, कि जब हम उसके साथ दु:ख उठाएं तो उसके साथ महिमा भी पाएं। क्योंकि मैं समझता हूं कि इस समय के दु:ख और क्लेश उस महिमा के सामने, जो हम पर प्रगट होनेवाली है, कुछ भी नहीं हैं।

रो 8:16–18

चूंकि हम मसीह के संगी वारिस हैं, हमें उनके साथ दु:ख उठाना चाहिए ताकि हम उनके साथ महिमा भी पाएं। आइए हम यह न सोचें कि हम एक कठिन समय से गुजर रहे हैं भले ही हम अत्याचार या कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। स्वर्ग की महिमा को देखते हुए, आइए हम सभी कठिनाइयों का सामना करें। भले ही वह कठिन है, परमेश्वर के वारिस के रूप

में आइए हम साहस और दृढ़ विश्वास के साथ प्रतिष्ठा को संभाले रखते हुए सुसमाचार के पथ पर चलें।

Leave a Reply