सब्त के दिन को पवित्र मानो

न कुछ बढ़ाना और न कुछ घटाना

परमेश्वर के लोगों को परमेश्वर के वचन का पूरी तरह से पालन करना चाहिए। क्या होगा यदि हम परमेश्वर पर विश्वास करने का दावा करते हुए परमेश्वर के वचनों में कुछ बढ़ाएं या कुछ घटाएं?

मैं हर एक को, जो इस पुस्तक की भविष्यद्वाणी की बातें सुनता है, गवाही देता हूं: यदि कोई मनुष्य इन बातों में कुछ बढ़ाए तो परमेश्वर उन विपत्तियों को, जो इस पुस्तक में लिखी हैं, उस पर बढ़ाएगा। यदि कोई इस भविष्यद्वाणी की पुस्तक की बातों में से कुछ निकाल डाले, तो परमेश्वर उस जीवन के वृक्ष और पवित्र नगर में से, जिसका वर्णन इस पुस्तक में है, उसका भाग निकाल देगा।

प्रक 22:18–19

यदि हम परमेश्वर पर विश्वास करना और बचाया जाना चाहते हैं, हमें परमेश्वर के वचनों में से कुछ न बढ़ाना और कुछ न निकालना चाहिए।

सब्त के दिन की शुरुआत और परमेश्वर की आज्ञाएं

आज, आइए हम परमेश्वर के संपूर्ण वचनों में से सब्त के दिन के बारे में पढ़ें।

यों आकाश और पृथ्वी और उनकी सारी सेना का बनाना समाप्त हो गया। और परमेश्वर ने अपना काम जिसे वह करता था सातवें दिन समाप्त किया, और उसने अपने किए हुए सारे काम से सातवें दिन विश्राम किया। और परमेश्वर ने सातवें दिन को आशीष दी और पवित्र ठहराया; क्योंकि उसमें उसने सृष्टि की रचना के अपने सारे काम से विश्राम लिया।

उत 2:1–3

परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी को बनाया, और आखिरी दिन, सातवें दिन में विश्राम लिया। उन्होंने सातवें दिन को सब्त के दिन के रूप में नियुक्त किया, और उसे दस आज्ञाओं में से चौथी आज्ञा के रूप में नियुक्त किया।

“तू विश्रामदिन को पवित्र मानने के लिए स्मरण रखना। छ: दिन तो तू परिश्रम करके अपना सब काम–काज करना; परन्तु सातवां दिन तेरे परमेश्वर यहोवा के लिए विश्रामदिन है। उसमें न तो तू किसी भांति का काम–काज करना, और न तेरा बेटा, न तेरी बेटी, न तेरा दास, न तेरी दासी, न तेरे पशु, न कोई परदेशी जो तेरे फाटकों के भीतर हो। क्योंकि छ: दिन में यहोवा ने आकाश, और पृथ्वी, और समुद्र, और जो कुछ उनमें हैं, सब को बनाया, और सातवें दिन विश्राम किया; इस कारण यहोवा ने विश्रामदिन को आशीष दी और उसको पवित्र ठहराया।”

निर्ग 20:8–11

क्या यह ठीक होगा कि भले ही परमेश्वर ने हमें सब्त के दिन को मनाने की आज्ञा दी, हम अपनी मरजी से उसे नहीं मनाएं?

कौन सा दिन सब्त का दिन है?

तब, कौन सा दिन सप्ताह का सातवां दिन, सब्त है?

पहले, आइए हम शब्दकोश देखें। शब्दकोश में रविवार सप्ताह के सात दिनों में पहला दिन है। शनिवार रविवार से सातवां दिन है। इसी तरह से, शब्दकोश के अनुसार, सातवां दिन सब्त जब हम परमेश्वर की आराधना करते हैं, शनिवार है।

इसके अतिरिक्त, बाइबल गवाही देती है कि सब्त शनिवार है।

सप्ताह के पहले दिन भोर होते ही वह जी उठ कर…

मर 16:9

यीशु कब जी उठे? वह सप्ताह का पहला दिन था।

वह रविवार की भोर को जी उठ कर…

मर 16:9 TEV

TEV बाइबल के अनुसार, यीशु किस दिन जी उठे? वह रविवार था। इसलिए सप्ताह का पहला दिन यानी सब्त का अगला दिन, रविवार है। चूंकि सब्त का अगला दिन रविवार है, सब्त जो रविवार का पिछला दिन है, कौन सा वार है? वह शनिवार है। इसलिए बाइबल का सब्त शनिवार है।

तब चर्च जो रविवार की आराधना करते हैं, बाइबल के सब्त के बारे में क्या कहते हैं? आइए हम कैथोलिक चर्च की पुस्तक, “The Faith of Our Fathers” देखें।

“कुछ और कहने की आवश्यकता नहीं, पर क्या सारे मसीही अनावश्यक सांसारिक काम रोक कर, रविवार को आदरयोग्य दिन नहीं मानते? क्या इस नियम का पालन करना हमारा सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य नहीं? लेकिन चाहे आप बाइबल को उत्पत्ति से लेकर प्रकाशितवाक्य तक पढ़ें, आप एक पद भी नहीं खोज पाएंगे जहां रविवार को पवित्र मनाने के लिए कहा गया हो। पवित्रशास्त्र शनिवार को पवित्र मानने के लिए कहता है, जिसे हम कभी नहीं मानते।”

The Faith of Our Fathers, पृष्ठ 72–73

वे बाइबल के सब्त को कौन सा दिन कहते हैं? यहां तक कि कैथोलिक पुस्तक का कहना है कि सब्त रविवार नहीं है पर शनिवार है; वे रविवार की आराधना मनाने पर भी इस तरह कहते हैं क्योंकि यह तथ्य इतना स्पष्ट है। उपर्युक्त सबूत हमें दिखाते हैं कि बाइबल का सब्त शनिवार है। तब आशीष पाने के लिए हमें किस दिन पर आराधना करनी चाहिए? हमें शनिवार के दिन आराधना करनी चाहिए, रविवार को नहीं।

परमेश्वर और उनके लोगों के बीच चिह्न

आइए हम देखें कि सब्त कितना महत्वपूर्ण है।

“तू इस्राएलियों से यह भी कहना, ‘निश्चय तुम मेरे विश्रामदिनों को मानना, क्योंकि तुम्हारी पीढ़ी पीढ़ी में मेरे और तुम लोगों के बीच यह एक चिह्न ठहरा है, जिससे तुम यह बात जान रखो कि यहोवा हमारा पवित्र करनेहारा है।’”

निर्ग 31:13

सब्त परमेश्वर और उनके लोगों के बीच एक चिह्न है। फिर क्या हम कह सकते हैं कि वे परमेश्वर के लोग हैं जो सब्त नहीं मनाते? नहीं।

“इस कारण तुम विश्रामदिन को मानना, क्योंकि वह तुम्हारे लिए पवित्र ठहरा है; जो उसको अपवित्र करे वह निश्चय मार डाला जाए: जो कोई उस दिन में कुछ कामकाज करे वह प्राणी अपने लोगों के बीच से नष्ट किया जाए।”

निर्ग 31:14

पुराने नियम के समय में, ऐसा अभिलेख है कि जिन्होंने सब्त नहीं मनाया उन पर पथराव किया गया, और वे मर गए(गिन 15:32)।

यीशु और उनके चेलों ने सब्त मनाया

कुछ लोग कहते हैं कि नए नियम में सब्त मिटा दिया गया। क्या वे सही हैं? पहले, आइए हम देखें कि यीशु ने जो नए नियम के समय में उद्धारकर्ता के रूप में आए सब्त मनाया या नहीं।

फिर वह नासरत में आया, जहां पाला पोसा गया था; और अपनी रीति के अनुसार सब्त के दिन आराधनालय में जाकर पढ़ने के लिए खड़ा हुआ।

लूक 4:16

यीशु ने हर सप्ताह सब्त मनाने का नमूना दिखाया। कुछ लोगों का कहना है कि यीशु के क्रूस पर चढ़ाए जाने से पहले सब्त मनाया जाता था, लेकिन उसके बाद मिटा दिया गया। क्या वे सही हैं? आइए हम क्रूस के बाद प्रेरितों के कार्य को देखें।

पौलुस अपनी रीति के अनुसार उनके पास गया, और तीन सब्त के दिन पवित्र शास्त्र से उनके साथ वाद–विवाद किया; और उनका अर्थ खोल खोलकर समझाता था कि मसीह को दु:ख उठाना, और मरे हुओं में से जी उठना, अवश्य था; और “यही यीशु जिसकी मैं तुम्हें कथा सुनाता हूं, मसीह है।”

प्रे 17:2–3

यीशु के नमूने का पालन करते हुए प्रेरित पौलुस ने सब्त मनाया। इसलिए उनका यह हठ गलत है कि क्रूस के बाद सब्त मिटा दिया गया। नया नियम कभी नहीं कहता कि हमें सब्त के बदले रविवार मनाना चाहिए। बाइबल हमें अंत के दिन तक सब्त मनाने की आज्ञा देती है(मत 24:20)।

फिर यीशु ने और उनके चेलों ने सब्त क्यों मनाया?

“जो मुझ से, ‘हे प्रभु! हे प्रभु!’ कहता है, उनमें से हर एक स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न करेगा, परन्तु वही जो मेरे स्वर्गीय पिता की इच्छा पर चलता है। उस दिन बहुत से लोग मुझ से कहेंगे, ‘हे प्रभु, हे प्रभु, क्या हम ने तेरे नाम से भविष्यद्वाणी नहीं की, और तेरे नाम से दुष्टात्माओं को नहीं निकाला, और तेरे नाम से बहुत से आश्चर्यकर्म नहीं किए?’ तब मैं उनसे खुलकर कह दूंगा, ‘मैंने तुम को कभी नहीं जाना। हे कुकर्म करनेवालो, मेरे पास से चले जाओ।’”

मत 7:21–23

शनिवार को सब्त मनाना परमेश्वर की इच्छा है। इसलिए केवल वे जो बाइबल का पालन करते हुए सब्त मनाते हैं, स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकते हैं।

हमारे विश्वास का उद्देश्य बचाया जाना और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करना है। आइए हम सब परमेश्वर की इच्छा सब्त मनाएं, और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करें।

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